शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2013

..प्यार एक पवित्र भावना है

दोनों एक दुसरे से बहुत प्यार करते थे .....उन्होंने  साथ जीने और मरने की कसम खाई थी पर .....उनका ये प्यार बड़ों को गवारा नहीं हुआ .....जाति बंधन आड़े आ गया ....समय से पहले  दो फूल मुरझा गए .....लड़की की शादी हो गई पर पहले प्यार को भूल न पाई . लड़का भी कहाँ भूल पाया ? दिल के हाथों मजबूर होकर लड़की के घर के पास आकर आवाज लगाता .छोटी बहन उसके प्यार की राजदार थी .बहन के आँसू कोई देख न ले इस बात का प्रयास करती . दोनों प्रेमियों ने कभी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया .उनका प्यार आज भी जिन्दा है एक दूसरे के दिलों में क्योंकि उनका प्यार जिस्मानी नहीं ...आत्मिक था .जिसका आधार त्याग था ....लूट-खसोट नहीं ....वर्तमान समय में प्यार करनेवाले की गन्दी हरकतें देख प्यार पर प्रश्न चिन्ह लगाने को जी चाहता है ....प्यार एक पवित्र भावना है जिसे समझना सबके वश की बात नहीं  .

4 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम न बाड़ी उपजे ,प्रेम न हाट बिकाय ,

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  2. सही बात ....प्रेम प्रकृति द्वारा प्रदत एक
    अनमोल उपहार है जो सबके नसीब में नही होता ....

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